संपादकीय

आज दुनिया बहुत ही तेज़ी से तरक्की कर रही है। प्रतिदिन एक नया वैज्ञानिक अविष्कार हो रहा है। प्रतिदिन एक नई कम्पनी एक नया उत्पाद बाज़ार में उतार रही है। हर कम्पनी ने इस साल, और आने वाले ३-४ सालों का प्रयोजना लक्ष्य बना लिया है।  उस लक्ष्य को पाने की जिम्मेदारी कम्पनी के कर्मचारियों की है। किसने कितना लक्ष्य पूरा किया, उस हिसाब से पदोन्नति और वेतन में इजाफा मिलेगा। हर कर्मचारी लक्ष्य पाने के तनाव दिन रात मेहनत करता रहता है। आम लोगों के ऊपर एक अलग प्रकार का तनाव है। उस नए उत्पाद को कौन सबसे पहले इस्तेमाल करेगा? इतना ही नहीं उसके बारे में कौन सबसे पहले ट्वीट करेगा, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर समीक्षा करेगा। हम ये सब करने का तनाव लेते जाते हैं, और यही तनाव हमारे शरीर को अंदर से खोखला बनाता जाता है। हमे इसका एहसास भी नहीं होता, और एक दिन हमे किसी बड़ी बीमारी या शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ता है। वैसे तो ईश्वर ने हमारे शरीर को बहुत मजबूत बनाया है किन्तु धीरे धीरे शरीर के किसी अंग में तनाव एकत्रित होने से शरीर कमज़ोर होता जाता है। हमे लगता है कि हम तो अच्छे से खाना पीना कर रहे थे फिर भी क्यों ये बीमारी। हमने तनाव को हमेशा अनदेखा किया है। हमें अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही तनाव से निपटने की शिक्षा देनी चाहिए। हमने अगर थोड़ा सा भी तनाव एकत्रित होने दिया तो हम कमजोर होने लगेंगे। अम्स्टेल-गंगा परिवार आप सभी से अनुरोध करता है कि, अपने स्वास्थ को सबसे पहली प्राथमिकता दीजिये। कार्यालय के कार्य को वहीं पर करिये घर तक ना लाएँ। कभी कभी डिजिटल दुनिया की होड़ से दूर रह कर और कुछ क्षणों के लिए अपनी आँखों को बंद कर के बैठिये। दो-चार लंबी सांसे लीजिये और तनाव को जाने दीजिये। योग को अपनायें और अपने शारारिक और मानसिक स्वस्थ्य को मजबूत बनायें ।बच्चों की गर्मी की छुट्टियाँ समीप हैं। हम सभी माता-पिता जनों से अनुरोध करते हैं कि उसके ऊपर से पढ़ाई के तनाव को कुछ दिनों के लिए दूर करें। उनको किसी ग्रीष्मकालीन शिविर में ले जाएँ, जहाँ उन्हें खेलने और संसार के बारे में कुछ नए और रोचक तथ्य जानने को मिलें।

हर बार की तरह आपसे अनुरोध है कि, हमें अपनी प्रतिक्रिया से अवगत अवश्य करायें।

धन्यवाद।
- अमित कुमार सिंह , अखिलेश कुमार एवं डॉ पुष्पिता अवस्थी

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