संपादकीय

साहित्य सर्वदा समय सन्दर्भित रहा है, दायित्वबोध ही उसका चरम लक्ष्य रहता है।

क्रोध, हताशा, निराशा, और ,अवसाद, मानव शरीर को अन्तर्भाग से खोखला करते जाते हैं। इनका कुप्रभाव तत्काल एवं दीर्घकालिक, दोनों ही प्रकार का होता है।  तत्कालिक प्रभाव के अन्तर्गत सोचने, समझने, और सही निर्णय लेने की क्षमता समाप्त हो जाती है। दीर्घकालिक प्रभाव के अन्तर्गत कोलेस्ट्रॉल, मानसिक असंतुलन, मोटापा, रक्त चाप जैसी बीमारियां मानव शरीर में घर करने लगती हैं। अब जबकि हम इन कुप्रभावों से अवगत हैं, क्या हमें निरंतर खुश और उत्साहित रहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए ? सदैव खुश और उत्साहित रह पाना संभव नहीं है। जब ये संसार और हमारे आस – पास के लोग हमारी इच्छा अनुसार  नहीं चलते तो हमें दुःख होता है। अब सवाल यह है कि , आख़िर हम क्यों चाहते हैं कि सभी हमारे अनुसार निर्णय लें, या हमारे कहे का पालन करें ? हमारी ख़ुशी किसी कारण की मोहताज क्यों है ? हमें अन्तः मन में खुश रहना सीखना होगा। मन का नहीं होने पर या बिना किसी कारण भी हम खुश रह पाएं, ऐसा अभ्यास करना होगा। क्रोध, हताशा, निराशा, और ,अवसाद को पूरा समाप्त कर पाना संभव नहीं है। किन्तु इन सभी को क्षणिक मात्र रख पाना संभव है। साहित्य ही वह साधन है जो व्यक्ति को अवसाद से बहार निकाल कर स्वस्थ और प्रशन्नचित्त रखता है । एक असीम आत्मबल और मन की शांति प्रदान करता है।

छोटे बच्चे , हमसे सीखते हैं और हम जो कुछ भी करते हैं , उसी को दोहराते हैं। बच्चों के सामने तो क्रोध, हताशा, निराशा, और ,अवसाद की अभिव्यक्ति बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। बच्चों को बस यही सीख देनी है , निरंतर कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है।

 

२ अक्टूबर २०१९ को सम्पूर्ण विश्व महात्मा गाँधी जी की १५० वीं  वर्षगाँठ मना रहा है। इस उपलक्ष पर भारत सरकार देश विदेश में विभिन्न स्तर पर गाँधी जी के जीवन से जुड़ी झाँकियाँ प्रस्तुत कर रहा है। गाँधी जी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करते हुए भारत ने खुले में शौच को लगभग पूर्णविराम लगा दिया है। पिछले ५ सालों में भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग ११ करोड़ नए शौचालय  बनाए गए हैं। भारत सरकार ने गाँधी जी की १५० वीं जयन्ती के उपलक्ष में गाँधी जी के जीवन से जुड़े तथ्यों से अवगत करवाने और जयन्ती को हर्ष और उल्लास से मानाने के लिए एक नयी वेबसाइट बनाई है।

https://gandhi.gov.in/

हमें अपने सभी पाठकों को सूचित करते हुए हर्षानुभूति हो रही है कि, अम्स्टेल -गंगा पत्रिका की संस्थापक एवं संरक्षिका डॉ पुष्पिता अवस्थी जी को वर्ष २०१९ का गाँधी-विनोबा शांति सम्मान से विभूषित किया गया है। डॉ. पुष्पिता अवस्थी जी को आचार्य विनोबा भावे द्वारा संस्‍थापित “आचार्यकुल” के “शिक्षकों के उन्‍नयन में आचार्यकुल की भूमिका एवं नई दिशाएँ” विषयक अखिल भारतीय अधिवेशन में आचार्यकुल का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।  अम्स्टेलगंगा परिवार पुष्पिता जी को उनकी इस नयी जिम्मेदारी के लिए ढेरो बधाई और शुभकामनायें देता है।

हम आशा करते हैं कि अम्स्टेल-गंगा का यह अंक आपको पसंद आएगा और आपका और हमारा साथ निरंतर बना रहेगा।

- अमित कुमार सिंह एवं डॉ पुष्पिता अवस्थी

Recent Posts