संपादकीय

सर्व प्रथम हम अम्स्टेल गंगा के सभी पाठकों और शुभचिंतकों से अम्स्टेल गंगा का अप्रैल २०१७ अंक प्रस्तुत ना कर पाने के लिए क्षमा चाहतें हैं। आप सभी के ईमेल से हमें यह ज्ञात हुआ कि आप अम्स्टेल गंगा परिवार से कितना प्रेम करते हैं। आपके ईमेल पढ़ कर हमें हर्ष अनुभूति हुई और एक बार पुनः पुरे जी जान से अम्स्टेल गंगा के जुलाई २०१७ अंक पर कार्य करने की ऊर्जा प्राप्त हुई। हम आशा करते हैं की इस अंक से हम आप सभी को संतुष्ट कर पाएंगे।

आप सबको यह सूचित करते हुए हमें बड़े हर्ष और गौरव का अनुभव हो रहा है की अम्स्टेल गंगा की संस्थापक एवं संरक्षक मंडल की सदस्या, प्रोफेसर पुष्पिता अवस्थी जी को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नीदरलैंड में हिंदी के प्रचार-प्रसार में अनुकरणीय योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति (पूर्व) प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा का पद्मभूषण डॉ मोटूरि सत्‍यनारायण सम्मान प्रदान किया । ये पुरस्कार हिंदी के प्रति उनके पूर्ण समर्पण और निष्ठा को दर्शाता है और इसके साथ ही हमारी बढ़ी हुई जिम्मेदारी का भी हमें अहसास कराता है। आशा है की आप सबके सहयोग से हम इसमें जरूर सफल होंगे और आपको निरंतर उत्कृष्ट हिंदी साहित्य का रसास्वादन करते रहेंगे ।

एक और महत्वपूर्ण घटना जिसका हम यहाँ उल्लेख करना चाहेंगे वह है तेरह साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का नीदरलैंड्स दौरा। नीदरलैंड्स में प्रधानमंत्री मोदी जी का भव्य स्वागत हुआ। यहाँ मोदी जी के हिंदी में दिए गए भाषण की गूँज पूरे विश्व में सुनाई दी।  उनके इस प्रयास ने हमारे हिंदी के प्रति समर्पण और उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया। उनके जोशीले भाषण ने अप्रवासीय भारतीय और भारतवंशिओं का मन मोह लिया और उन्हें अपने देश और हिंदी के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा भी दे गया ।

प्रकृति ने जितनी भी रचनाएँ की हैं हमारे समक्ष उन सबका औसत मात्र प्रकट किया होता तो हम जीवन के अनेकों अनुभवों से अनभिज्ञ रह जाते। पृथ्वी पर प्राण दाई जल और वायु है किन्तु अन्य ग्रहों पर दोनों उपलब्ध नहीं हैं। यदि सभी ग्रहों में जल और वायु होते तो हम पृथ्वी का महत्व कभी नहीं समझ पाते। सागर में पीने योग्य पानी होता तो हम सार्वकालिक नदियों और भूजल के महत्व को कभी नहीं समझ पाते। अच्छे का अर्थ समझना है तो बुरे को जानना होगा। सुंदरता का बखान वही कर सकता है जिसने कुरूप भी वर्णन किया हो। छोटा-बड़ा, मोटा-पतला, नाटा-लंबा, और ऐसे अनेकों शब्द एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। यदि सभी का शारीरिक बनावट, रंग, कद काठी एक सा होता तो हमें अलग-अलग शब्द इस्तेमाल ही नहीं करना पड़ता। सभी पहाड़ एक बराबर ऊँचे होते, सभी नदियां एक जैसी लम्बी और सभी महासागर एक जैसे गहरे होते तो शायद उनमें हम सभी की रूचि काफी कम रहती। हम उत्सुकता से उन सभी के बारे में जानने की कोशिश करते हैं क्योंकि वे सभी भिन्न हैं। प्रकृति सबको और सब कुछ अलग बनाया हैं। प्रकृति का हर निर्माण अदभुत।
हर किसी का इस संसार में एक सा महत्व है, हमें किसी को भी उसके आकर और प्रकार से सम्मान नहीं देना चाहिए। अतः हमें किसी के प्रति किसी भी प्रकार के तिरस्कार की भावना नहीं रखनी चाहिए।

पानी का महत्व प्यास लगने पर, भोजन का महत्व भूख लगने पर, सुख का महत्व दुःख के बाद, आराम का महत्व दर्द होने पर, और प्रकाश का महत्व अंधकार होने पर ही समझ आता है। “प्रकाश” का महत्व समझना है तो “अंधकार” को जानना आवश्यक हो जाता है। प्रश्न ये है कि प्रकाश और अंधकार में से अधिक शक्तिशाली कौन है?  प्रकाश को कैद करना है तो उसे चहु ओर से बंद करना पड़ता है किन्तु अंधकार को कैद करने के लिए प्रकाश का एक छोटा सा साधन ही पर्याप्त है। अंधकार प्रकाश को नहीं हटा सकता किन्तु प्रकाश अंधकार को आसानी से हटा सकता है। इस तथ्य का स्मरण निरंतर रहे कि ‘अंधकार’ को किसी स्रोत की जरूरत नहीं है, ‘अंधकार’ सर्व व्यापी है। हर वो स्थान जहाँ प्रकाश नहीं पहुँच रहा, वो ‘अंधकार’ के अधीन होगा। रात में सूर्य किरणों की अनुपस्थिति हमें अंधकार का अनुभव कराती है। जैसे रात्रि में छाए अंधकार को हटाने के लिए ज्योति अपेक्षित है, ठीक उसी प्रकार अपने मन में छाये तम को दूर करने के लिए ध्यान रूपी ज्योति प्रज्वलित करके रखना आवश्यक है। नित्य व्यायाम और योग करके भीतर एक ज्योत प्रज्वलित करने की आवश्यकता है। ज्योत के बुझने से हमारे भीतर अंधकार स्वतः ही हो जायेगा और अंधकारमय जीवन हमें निराशा की ओर अग्रसर करेगा। अतः अंधकार को प्रकाश से दूर करना अत्यंत आवश्यक है। अम्स्टेल गंगा परिवार की निरंतर ये कामना है कि आप सभी के जीवन में अच्छा स्वास्थ और मुख पर प्रसन्नता निरंतर बनी रहे। हम आशा करते हैं कि आप ना सिर्फ योग दिवस पर बल्कि प्रतिदिन योग अभ्यास करते होंगे।

हम आशा करते हैं कि इस अंक में चयनित लेख, कविता, कहानियाँ, और चित्रकारी आप सभी को सृजन के आनंद से पूर्ण कर आत्मीय सुख प्रदान करेगी। आपसे अनुरोध है कि, हमें अपनी प्रतिक्रिया से अवगत अवश्य कराएं।

धन्यवाद।
- अमित कुमार सिंह , अखिलेश कुमार एवं डॉ पुष्पिता अवस्थी

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