ये हवा

 

उनके लाल कपोलों को
छुकर आई ये हवा
मन धड़काये, तन महकाये,
कैसी चलती शीतल हवा।
इस ठंडी हवा में भी
ताजगी का ऐहसास है
वो खुद चली आ रही है।
ऐसा हुआ आभास है।
मन प्रफुल्लित जैसे हुआ।
उनके लाल कपोलों को
छुकर आई ये हवा ।
मन ही मन मुस्काती होगी
इंतजार होगा उसे भी मेरा
तन से चद्दर लपेटती हुई
ध्यान करती होगी मेरा
चाहती होगी बाहों में भरना।
उनके लाल कपोलों को
छुकर आई ये हवा ।
रूख बदल कर यहीं से अपना
तु वापिस उनके पास जा
मन धड़का कर तुम उनका
उनको मेरी याद दिला ।
मिलेंगे बहुत जल्द उन्हें कहना।
उनके लाल कपोलों को
छुकर आई ये हवा ।

- नवल पाल

कंप्यूटर ऑपरेटर ,
झज्जर , भारत

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>