मेरी गजल को प्यार से गुना गुना के देखिये

 

ताज ना बना सको तो मत करो मलाल ,
किसी को मुमताज बना कर तो देखिये।
मत भागो नामुराद जिस्मो के पीछे ,
पाक रूह को अपना बना कर तो देखिये।

आंधिया खुद मोड देगी अपनी राहे ,
हिम्मत का दीपक जला कर तो देखिये।

लाख दुश्मन हे जहा तो क्या ,
दोस्ती का हाथ बड़ा कर तो देखिये।

बेवफा कितनी हे मुहब्बत तो क्या
वफ़ा का संसार बना कर तो देखिये।

एक एह्सास हे प्यार
आजमा कर तो देखिये।
जब भी हो माहोल में गम की तासीर ,
मेरी गजल को प्यार से गुन गुना के देखिये।

- राजेश भंडारी “बाबु”

जन्म स्थान : जिला उज्जैन (म.प्र.)
वर्तमान निवास : इंदौर ४५२०१६ (म.प्र.)
शिक्षा : एम.काम., एल.एल.बी. ,एम.बी ए.(फाइनेंस)
प्रकाशन :
स्कुल/कालेज के समय से ही लेखन कार्य में रूचि रही| नई दुनिया, देनिक पत्रिका , देनिक भास्कर ,औधिच्च बंधू ,औधिच्य समाज ,अग्निपथ ,देनिक दबंग, प्रिय पाठक,अक्छर वार्ता ,मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति की पत्रिका वीणा ,शब्द प्रवाह वा अन्य पत्र परिकाओ में समय समय पर लेख ,कविता ,व्यंग प्रकाशित | मालवी के प्रचार प्रसार हेतु समय समय पर लेख वा कविताओ का प्रकाशन | इन्टरनेट के वा अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों से मालवी के प्रचार प्रसार निरंतर प्रयास रत हे | यू ट्यूब पर करीब ५० वीडियो उपलोड हे |फेसबुक के माध्यम से देश विदेश के मालवी भाषी हजारों लोगो से निरंतर जुड़े हुवे हे और मालवी सस्कृति की विलुप्त होती चीजों को जन जन तक पहुचाने के लिए प्रयासरत हे |नेट ब्लॉग के माध्यम से भी मालवी को देश विदेश के लोगो तक पहुचाने में प्रयास रत हे | आज कही भी कवि गोष्ठी होती हे तो मालवी की हाजरी जरुर लगती हे अखंड संडे ,मालवी जाजम और भी कई संथाओ में नियमित मालवी कविता पाठ करने जरुर जाते हे |

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