फाइलें गुम हो गई हैं

समाचारपत्रों में छप गया। दूरदर्शन के चैनलों का चिल्‍ला-चिल्‍ला कर गला बैठ गया, संसद में भी घमासान हो गया कि कोयला मंत्रालय की कई सौ फाइलें गुम हो गई हैं। फाइलों की स्थिति अनाथ बच्‍चों की सी है। गुम गया तो गुम गया। हमारे देश के आधुनिक इतिहास में में गुमे हुए बच्‍चों में से आधे भी खोजे नहीं जा सके। किसी को उनकी खोज ही नहीं होती, तो गुमना तो उन्‍हें है ही। जब बात संसद और उच्‍चतम न्‍यायालय तक जा पहुंची तो कोयला मंत्रालय में कुछ हलचल हुई। हुआ यह कि न्‍यायालय का चपरासी कोयला सचिव को बुलाने मंत्रालय में पहुंच गया। तब कोयला- सचिव को लगा कि मामला कुछ गंभीर है।
सचिव ने अपने चपरासी को डांटा, ” फाइलें गुम हो गई थीं तो खोजीं क्‍यों नहीं।”
”आपने खोजीं।” चपरासी ने साहस कर पूछा।
” मेरा काम गुम करना है। खोजना तुम्‍हारा काम है ।” सचिव ने कहा, ”मैं अपना काम कर रहा हूं, तुम अपना काम करो।”
”गुम जातीं तो मैं खोज देता ; किंतु मुझे लगता है कि वे या तो गुम कर दी गई हैं, या फिर चोरी कर ली गई हैं। उनको खोजने की मेरी क्‍या औकात है।”
”मंत्रालय में चोरी। ” सचिव ने मुंह बनाया, ” यहां चोरी का क्‍या प्रश्‍न। पर खैर चोरी भी हुई हैं तो खोजो। तुम्‍हारा काम है खोजना।”
चपरासी कुर्सी पर बैठा ऊंघता रहा। आज तक तो उसने यही देखा था कि उसे कहा गया कि इस नंबर की फाइल अल्‍मारी से निकालो। अब, जब अल्‍मारी में नहीं है, तो वह कहां खोजने जाए। वह मंत्रालय का चपरासी है, कोई सी. बी. आई. का डायरेक्‍टर नहीं। तो वह कहां खोजने जाए। सोचते-सोचते वह ऊंघ गया। ऊंघना मस्तिष्‍क की वह अवस्‍था है, जिसमें कुछ लोगों पर बहुत महान् विचार अवतरित होते हैं। चपरासी पर भी एक विचार अवतरित हुआ ; और उसे फाइलें खोजने का सूत्र मिल गया।
वह मंत्रालय से बाहर निकला और सीधे कमला मार्किट के थाने में पहुंच गया। यही वह थाना है, जो जोधपुर में हुए अपराध की भी रपट लिख लेता है। फाइलें तो फिर दिल्‍ली में ही गायब हुई हैं। कोई मंत्री गुम हुआ होता तो वह संसद मार्ग के थाने में जाता, किंतु ये तो बेचारी फाइलें हैं। इनकी रपट यहीं लिखी जा सकेगी।
द्वार के साथ ही मेज-कुर्सी लगा कर एक महिला सिपाही बैठी थी।
”क्‍या है ।” उसने पूछा।
चपरासी सोच में पड़ गया कि हिंदी भाषा में उसकी इस क्रिया को बोलना कहेंगे या भौंकना। फिर सोचा कि वह अपने काम से काम रखे, व्‍यर्थ ही बीच में वैयाकरण की भूमिका धारण न करे।
बोला, ”गुमशुदा की रपट लिखानी है। ”
” तेरी मां किसी के साथ भाग गई है क्‍या।” वह बोली, ”जाकर अपने मुहल्‍ले में ढूंड कि कोई पुरुष भी गायब है क्‍या।”
”मेरी मां भागी नहीं थी। उसे तो वे लोग उठा कर ले गए थे।”
” कौन उठा कर ले गया था। तेरे सामने उठा कर ले गए थे। और कौन- कौन था वहां। तब रपट लिखाई थी क्‍या।”
चपरासी ने सोचा, इस सिपाही का नाम प्रश्‍नमाला होना चाहिए। चुप ही नहीं हो रही। बोलती ही जा रही है। और फाइलों के स्‍थान पर उसकी मां का किस्‍सा ले बैठी है।
”सब थे।” वह बोला, ” पूरी बिरादरी ही थी। वे लोग उसको उठा कर ले गए थे। मैं भी साथ गया था। मेरे बाबा भी साथ गए थे।”
सिपाही उसे देखती रही : क्‍या बक रहा है यह।
”रपट लिखाई थी।”
”हां श्‍मशान में रपट लिखाई थी। डेथ सर्टिफिकेट भी लिया था।”
सिपाही की समझ में कुछ- कुछ आया। वह अपनी मां की अर्थी की चर्चा कर रहा था। अर्थी तो उठाई ही जाएगी।
”तो फिर आज किस की रपट लिखानी है।”
” मैं कोयला मंत्रालय से आया हूं। हमारे मंत्रालय में से कई सौ फाइलें गुम हो गई हैं। उन्‍हें खोजना है।”
”अरे फाइलें हैं , कोई बच्‍चा तो नहीं है, जिसे खोजें।”
”मुझे मंत्रालय से भेजा गया है कि मैं एफ. आई. आर. दर्ज कराऊं। आप एफ. आर. दर्ज करेंगी।”
”लिखना मेरा काम है। लिख रही हूं।” वह बोली, ” खोजना मेरा काम नहीं है।”
”खोजना मेरा काम भी नहीं है।” चपरासी उठ कर खड़ा हो गया।
रपट लिखने वाली ने एक सिपाही को बुलाया और कागज़ का एक टुकड़ा पकड़ा दिया, ” इन्‍हें खोज कर ला।”
सिपाही कागज़ ले कर निकल गया। कहां जाए। पहले तो पान वाले की दुकान पर गया। सिग्रेट पिया। गुटका मुंह में डाला और पूछा, ” फाइलें देखी हैं। ” फिर रुक कर बोला, ”कोयला मंत्रालय से कुछ फाइलें गुम हो गई हैं। उन्‍हें देखा है।”
पान वाला कुछ देर सोचता रहा फिर बोला, ” जो कुछ भी गुम हुआ है, यदि वह स्‍त्री है तो जी. बी. रोड के कोठों में ढूंडो।”
”क्‍यों । वहां क्‍यों।”
”क्‍योंकि सारे देश में से जो भी स्‍त्री गुम होती है, वह अंतत: वहीं पहुंचती है; इसलिए वहीं मिलती भी है। मैं वहां जाया करता था। एक भली औरत से याराना हो गया। मैं उसे वहां से निकाल लाया। उससे विवाह कर लिया, पर वह आज भी धमकाती है कि वह वापस वहीं लौट जाएगी।”
” और यदि गुम होने वाली चीज़ पुरुष है तो ।”
” तो नदी नालों में ढूंडो। कहीं न कहीं तो उसका शव मिल ही जाएगा।”
सिपाही कुछ समझा, कुछ नहीं समझा। पर कहीं तो जाना ही था। वह जी.बी.रोड चला आया। पहले कोठे पर गया तो बाई ने उसका स्‍वागत किया।
”क्‍या बात है हवलदार, आज दिन दहाड़े ही चले आए। रात को बीवी ने लात मार कर बिस्‍तर से नीचे फेंक दिया था क्‍या। ये ब्‍याहताएं भी विचित्र हैं। एक मर्द को भी बांध कर नहीं रख सकतीं। हमारी लड़कियों को देखो, बीसियों हाथ बांधे खड़े रहते हैं।”
”वह सब छोड़। मज़ाक का टाइम नहीं है। ड्यूटी पर हूं। बता तेरे कोठे पर चोरी की फाइल आई है क्‍या।”
”चोरी की फाइल। वह क्‍या होती है। तेरी रखैल थी क्‍या।”
”अरे नहीं।” सिपाही बोला, ” कोयला मंत्रालय से फाइल चोरी हो गई है। वे लोग खोज रहे हैं। है तो दे दे। तेरा नाम भी नहीं लूंगा। नहीं तो मुसीबत में पड़ जाएगी। मंत्रालय की फाइल है। गरीब की लौ‍डिया नहीं है कि कोई तुझे कुछ नहीं कहेगा। तेरे पास निकली तो खा जाएंगे तुझे।”
”ऐ है। फाइल न हुई , हीरे की कनी हो गई। इतनी ही कीमती थी तो संभाल कर क्‍यों नहीं रखी। इस से ज्‍यादा तो हम अपनी लड़कियों की निगरानी रखते हैं। इन में से कोई दहलीज़ से बाहर पैर निकाल कर तो दिखाए। टांगें चीर कर धर दूंगी।”
”तो मैं क्‍या करूं। फाइल नहीं मिली तो मेरी तो नौकरी चली जाएगी। ”
”देख, मेरे पास फाइलें नहीं हैं। लड़कियां हैं। तू कहे तो दो चार लड़कियां दे दूं। जा कर मंत्रालय में उनके हवाले कर दे। वे ऐसी चालाक हैं कि मंत्री के पेट से भी निकाल लेंगी कि फाइलें कहां हैं।”
सिपाही प्रसन्‍न हो गया। बोला, ”बड़ी बी। तू ने मुझे रास्‍ता दिखा दिया। अब मेरा काम हो गया समझ।”
सिपाही थाने आ गया।
”फाइलें मिलीं।” थानेदार ने पूछा।
”समझिए मिल गईं।”
”कैसे।”
”कोठे वाली बाई कह रही थी कि चारों ओर अफवाह है कि फाइलें मंत्री के पेट में हैं। उसे वहां से निकलवाने के दो मार्ग हैं। या तो अस्‍पताल का सर्जन उनका पेट चीर कर निकाले, या कोठे की लड़कियां उनके मु्ंह के रास्‍ते उगलवा लें। वैसे यह काम पुलिस का डंडा भी कर सकता है, किंतु उसका साहस आप नहीं कर सकते।”
”ऐसा क्‍या है, जो कोठे की लड़कियां कर सकती हैं और मैं नहीं कर सकता।”
”कोठे की लड़कियां नंगी हो भी सकती हैं और मंत्रालय वालों को नंगा कर भी सकते हैं। आप इन दोनों में से एक भी नहीं कर सकते।”
”सच तो यही है। ” थानेदार उदास हो गया, ”कितने दुख की बात है कि इस देश की पुलिस के पास उतना भी अधिकार नहीं है, जितना कोठे की लड़कियों के पास है।”
एफ.आई. आर. लिखने वाली सिपाही आ कर खड़ी हो गई, ” क्‍या बात है सर।”
”अरे उन गुमी हुई फाइलों का क्‍या करूं।”
”सर, हम एफ. आई. आर. का रजिस्‍टर गुम कर देते हैं। जब एफ. आई. आर. ही नहीं मिलेगा, तो वे कैसे पूछेंगे कि फाइलें क्‍यों नहीं मिलीं।”
” और वह चपरासी, जो रपट लिखवा कर गया है। उसके पास प्रतिलिपि होगी।”
”तो उस चपरासी को भी गुम कर देते हैं।” सिपाही बोला।
थानेदार ने प्रसन्‍न हो कर सिपाही को देखा, ” शाबाश। तू बड़ा समझदार है। एक काम कर।”
” जी।” सिपाही हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया।
”आज शाम तक या तो फाइलें खोज कर ले आ या फिर उस चपरासी को सदा के लिए गुम कर दे।”

डॉ. नरेन्द्र कोहली

डॉ. नरेन्द्र कोहली के विषय में

जन्म : स्यालकोट (अविभाजित पंजाब) में जन्म हुआ। यह नगर अब पाकिस्तान में है।

शिक्षा : एम. ए. , पी-एच.डी.(विद्या वाचस्पति) की उपाधि प्राप्त की।

आजीविका : पहली नौकरी दिल्ली के पी.जी.डी.ए.वी.(सांध्य) कॉलेज में हिंदी के अध्यापक (1963-65ई.) के रूप में की। दूसरी नौकरी दिल्ली के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में 1965 ई. में आरंभ की और 1 नवंबर 1995 ई. को पचपन वर्ष की अवस्था में स्वैच्छिक अवकाश लेकर नौकरियों का सिलसिला समाप्त कर दिया।

 लेखन

प्रथम रचना : लिखने और छपने की इच्छा बचपन से ही थी। छठी में कक्षा की हस्तलिखित पत्रिका में पहली रचना प्रकाशित हुई। आठवीं कक्षा में स्कूल की मुद्रित पत्रिका में एक कहानी  ‘हिंदोस्तां : जन्नत निशां’ उर्दू में प्रकाशित हुई। हाई स्कूल के ही दिनों में हिंदी में लिखना आरंभ हुआ। ‘किशोर’ (पटना), ‘आवाज़’ (धनबाद) इत्यादि में कुछ आरंभिक रचनाएं, बाल लेखक के रूप में प्रकाशित हुईं। आई.ए.की पढ़ाई के दिनों में एक कहानी ‘पानी का जग,गिलास और केतली’, ‘सरिता’ (दिल्ली) के ‘नए अंकुर’ स्तंभ में प्रकाशित हुई थी। नियमित प्रकाशन का आरंभ फरवरी 1960 ई. से आरंभ हुआ। इसलिए अपनी प्रथम प्रकाशित रचना ‘दो हाथ’ (कहानी,इलाहाबाद, फरवरी 1960 ई.) को मानते हैं।

साहित्य

नरेन्द्र कोहली उपन्यासकार,कहानीकार,नाटककार, व्‍यंग्‍यकार तथा निबंधकार  हैं। वे अपने समकालीन साहित्यकारों से पर्याप्त भिन्न हैं। साहित्य की समृद्धि तथा समाज की प्रगति में उनका योगदान प्रत्यक्ष है। उन्होंने प्रख्यात् कथाएं लिखी हैं; किंतु वे सर्वथा मौलिक हैं। वे आधुनिक हैं; किंतु पश्चिम का अनुकरण नहीं करते। भारतीयता की जड़ों तक पहुंचते हैं,किंतु पुरातनपंथी नहीं हैं।

प्रकाशित रचनाएं

नरेन्द्र कोहली जी की लगभग एक सौ से अधिक निम्नलिखित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं है ।

1.प्रेमचंद के साहित्य सिद्धांत (शोध-निबंध) 1966 ई.

2. कुछ प्रसिद्ध कहानियों के विषय में (समीक्षा)- 1967 ई.

3.परिणति – (कहानियां)-1969/2000 ई.

4.एक और लाल तिकोन- (व्यंग्य)-1970/ 2000 ई.

5. पुनरारंभ – (उपन्यास)- 1972 /1994 ई.

6. आतंक (उपन्यास)- 1972 ई.

7. पांच एब्सर्ड उपन्यास (व्यंग्य) – 1972 /1994 ई.

8.आश्रितों का विद्रोह (व्यंग्य)- 1973 / 1991 ई.

9. जगाने का अपराध (व्यंग्य)- 1973 ई.

10. साथ सहा गया दुख (उपन्यास)- 1974 ई.

11. मेरा अपना संसार (लघु उपन्यास) – 1975 ई.

12. शंबूक की हत्या (नाटक)- 1975 ई.

13. दीक्षा (उपन्यास) – 1975 ई.

14.अवसर (उपन्यास)- 1976 ई.

15. प्रेमचंद (आलोचना)- 1976 ई.

16. जंगल की कहानी (उपन्यास) – 1977 / 2000 ई.

17. मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएं (व्यंग्य) – 1977 ई.

18. कहानी का अभाव (कहानियां)- 1977 / 2000 ई.

19. हिंदी उपन्यास : सृजन और सिद्धांत (शोधप्रबंध)- 1977 /1989 ई.

20. संघर्ष की ओर (उपन्यास)-1978 ई.

21. गणित का प्रश्न (बाल कथाएं) – 1978 ई.

22.आधुनिक लड़की की पीड़ा (व्यंग्य)-1978 / 2000 ई.

23. युद्ध (दो भाग), उपन्यास – 1979 ई.

24. दृष्टि देश में एकाएक (कहानियां)- 1979/2000 ई.

25. अभिज्ञान (उपन्यास)- 1981 ई.

26. शटल (कहानियां)- 1982/2000

27. त्रासदियां (व्यंग्य)-1982 ई.

28. नेपथ्य (आत्मपरक निबंध)-1983 ई.

29. नमक का कैदी (कहानियां)-1983 /2000 ई.

30. आत्मदान (उपन्यास)-1983 ई./2008 ई.

31. निचले फ्लैट में (कहानियां)- 1984 /2000 ई.

32. नरेन्द्र कोहली की कहानियां (कहानियां)-1984 ई.

33. संचित भूख (कहानियां)- 1985/2000 ई.

34. आसान रास्ता (बाल कथाएं)-1985

35. निर्णय रुका हुआ (नाटक)-1985 ई.

36. हत्यारे (नाटक)- 1985 ई.

37. गारे की दीवार (नाटक)-1986 ई./ 2010 ई.

38. प्रीतिकथा(उपन्यास)-1986 ई.

39. परेशानियां (व्यंग्य)-1986 /2000 ई.

40. बाबा नागार्जन (संस्मरण)-1987 ई.

41. महासमर- 1 (बंधन) -उपन्यास – 1988 ई.

42. माजरा क्या है? (सर्जनात्मक, संस्मरणात्मक, विचारात्मक निबंध)-1989 ई.

43. अभ्युदय (दो भाग) – उपन्यास – 1989 /1998 ई.

44. महासमर – 2, (अधिकार) – उपन्यास   - 1900 ई.

45. नरेन्द्र कोहली: चुनी हुई रचनाएं (संकलन)- 1990 ई.

46. समग्र नाटक (नाटक) – 1990 ई.

47. समग्र व्यंग्य (व्यंग्य)- 1991 ई.

48. एक दिन मथुरा में (बाल उपन्यास) – 1991 ई.

49. हम सब का घर (बाल उपन्यास)- 1991 ई.

50.समग्र कहानियां (कहानियां) भाग – 1, 1991 ई. भाग – 2, 1992 ई.

51. प्रेमचंद (समीक्षा) – 1991 ई.

52. महासमर – 3, (कर्म), – उपन्यास – 1991 ई.

53. ‘तोड़ो कारा तोड़ो’ – 1 (निर्माण) – उपन्यास – 1992 ई.

54. जहां है धर्म,वहीं है जय (महाभारत का विवेचनात्मक अध्ययन)-1993 ई.

55. महासमर – 4 (धर्म) – उपन्यास – 1993 ई.

56. ‘तोड़ो कारा तोड़ो’ – 2 (साधना) – उपन्यास – 1993 ई.

57. महासमर – 5 (अंतराल) – उपन्यास – 1995 ई.

58. क्षमा करना जीजी ! – उपन्यास – 1995 ई.

59. अभी तुम बच्चे हो – बाल कथा – 1995 ई.

60. प्रतिनाद (पत्र-संकलन) – 1996 ई.

61.आत्मा की पवित्रता (व्यंग्य) – 1996 ई.

62. किसे जगाऊं ? (सांस्कृतिक निबंध) 1996 ई.

63. महासमर – 6 (प्रच्छन्न) उपन्यास – 1997 ई.

64. नरेन्द्र कोहली ने कहा (आत्मकथ्य तथा सूक्तियां) -1997 ई.

65. मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएं (व्यंग्य) – 1997 ई.

66. गणतंत्र का गणित (व्यंग्य) – 1997 ई.

67. कुकुर (बाल कथा) – 1997 ई.

68. समाधान (बाल कथा) – 1997 ई.

69. महासमर – 7 (प्रत्यक्ष) उपन्यास – 1998 ई.

70. समग्र व्यंग्य – 1,  (देश के शुभचिंतक)  – व्यंग्य – 1998 ई.

71. समग्र व्यंग्य – 2 (त्राहि-त्राहि) – व्यंग्य – 1998 ई.

72. समग्र व्यंग्य – 3, (इश्क एक शहर का) – व्यंग्य – 1998 ई.

73. मेरी तेरह कहानियां, (कहानियां) – 1998 ई.

74. संघर्ष की ओर (नाटक) – 1998 ई.

75. किष्किंधा (नाटक) – 1998 ई.

76. अगस्त्यकथा (नाटक) – 1998 ई.

77. हत्यारे (नाटक) – 1999 ई.

78. महासमर – 8 (निर्बंध), – उपन्यास – 2000 ई.

79. स्मरामि (संस्मरण) – 2000 ई.

80. मेरे मुहल्ले के फूल (व्यंग्य) – 2000 ई.

81. समग्र व्यंग्य – 4 (रामलुभाया कहता है) – व्यंग्य – 2000 ई.

82. सब से बड़ा सत्य (व्यंग्य संग्रह) – 2003 ई.

83. वह कहां है (व्यंग्य संग्रह) – 2003 ई.

84. तोड़ो कारा तोड़ो- 3 (परिव्राजक)- 2003 ई.

85. तोड़ो कारा तोड़ो- 4 (निर्देश), 2004 ई.

86. न भूतो न भविष्यति – 2004 ई. प्रकाशक : वाणी प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली – 110002

87. स्वामी विवेकानन्द – 2004 ई.

88. समग्र व्‍यंग्‍य -5 (आयोग) – व्‍यंग्‍य – 2005 ई.

89. दस प्रतिनिधि कहानियां – 2006 ई.

90. कुकुर तथा अन्य कहानियां (बाल कथाएं) – 2006 ई.

91. एक दिन मथुरा में तथा अन्य कहानियां (बाल कथाएं) – 2009 ई.)

92. हम सबका घर तथा अन्य कहानियां (बाल कथाएं) – 2007 ई.

93.प्रजातंत्र का चक्रवर्ती – 2007 ई.

94. नवनीत (संकलित रचनाएं) – 2007 ई.

95. वसुदेव (उपन्‍यास) 2007 ई.

96. मेरे साक्षात्‍कार – (साक्षात्‍कार) -जनवरी 2008

97. तोड़ो कारा तोड़ो- 5 (संदेश), उपन्‍यास- फरवरी 2008 ई.

98. मेरे राम : मेरी रामकथा ( रामकथा का विवेचनात्‍मक अध्‍ययन) – 2009

99. आत्‍मरक्षा का अधिकार (व्‍यंग्‍य संकलन) – 2010

100. नरेन्‍द्र कोहली की यादगारी कहानियां (कहानी संकलन) – 2010

101. पूत अनोखो जायो ( उपन्‍यास) 2010 ई.

102. स्‍मृतियों के गलियारे से – संस्‍मरण फरवरी 2012

103. हिडिंबा – उपन्‍यास फरवरी – 2012

104. रोज़ सवेरे (कहानी संकलन) 2012

105. हुए मर के हम जो रुस्‍वा (व्‍यंग्‍य संकलन) 2012

106. संदेशवाहक (नाटक) 2012

107. कुंती – उपन्‍यास दिसंबर 2012;

 

पुस्तकों का अनुवाद

1.दीक्षा (नेपाली) 1978 ई., अनुवादक : सुवास दीपक, प्रकाशक: सुधा (पत्रिका), अक्तूबर 1978 ई. गांतोक

2.दीक्षा (कन्नड़)1981 ई.,अनुवादक: तिप्पेस्वामी तथा नागराज, प्रकाशक: आनन्द प्रकाशन, 1055 देवपार्थिव रोड, चामराज मुहल्ला, मैसूर।

3.निर्णय रुका हुआ (मराठी)1984 ई., अनुवादिका: श्रीमती लीला श्रीवास्तव, प्रकाशक: श्रीविशाख प्रकाशन, 58 शनिवार पेठ, पुणे।

4.आत्मदान (कन्नड़) 1987 ई., अनुवादक: श्री.रा.ना.ना. मूर्ति, प्रकाशक: संक्रांति पब्लिशर्स, फोर्ट, आजमपुर (कर्नाटक)

5.दीक्षा (उड़िया) 1988 ई., अनुवादक: डॉ. अजयकुमार पटनायक, प्रकाशक: उडिया हिंदी परिवेश, सूताहाट, कटक – 1

6.दीक्षा (मराठी) 1990 ई. अनुवादक: द. प. जोशी, प्रकाशक: मराठी साहित्य परिषद्, हैदराबाद।

7. बंधन (महासमर-1) – उड़िया- 1996 ई., अनुवादक: सुभाषचंद्र महापात्र, प्रकाशक: प्रजातंत्र प्रचार समिति, कटक।

8. अभिज्ञान (कन्नड़) 1997 ई., अनुवादक: डी.एन. श्रीनाथ,  प्रकाशक: काव्यकला प्रकाशन,1273,सातवां क्रॉस, चंद्र लेआउट, विजयनगर, बंगलूरु – 560040

9. दीक्षा (अंग्रेजी) 1997 ई., अनुवादक : सोमदेव कोहली,

प्रकाशक : क्रिएटिव बुक कंपनी, ई 4/24 ए, मॉडल टाउन, दिल्ली- 110009

10. अभिज्ञान (मलयालम – कर्मयोगम्) 1999 ई., अनुवादक: डॉ. के. सी. अजयकुमार,डॉ.(श्रीमती) के.सी. सिंधु, प्रकाशक: अमृतसागर,आतिथ्य, एट्टूमानूर

11. अभिज्ञान (मलयालम – कर्मयोगम्) 2006 ई., अनुवादक: डॉ. के. सी. अजयकुमार, डॉ.(श्रीमती) के.सी. सिंधु, प्रकाशक: श्री शबरीगिरि पब्लिकेशंस, कदापरा, कुंबनाड, (केरल)

12. बंधन (महासमर-1) – मलयालम – 2004 ई., अनुवादक : डॉ. शशिकुमार, प्रकाशक: सांस्कृतिक विभाग, केरल सरकार, तिरुवनन्तपुरम्

13. अभ्युदय (मलयालम – अभ्युदयम्), 2003 ई., अनुवादक : डॉ. (श्रीमती) के.सी.सिंधु तथा डॉ.के.सी. अजयकुमार, प्रकाशक : डी. सी. बुक्स, तिरुवनन्तपुरम्

14. दीक्षा (अंग्रेज़ी – इनिशिएशन) 2007 ई. अनुवादक : सोमदेव कोहली, प्रकाशक : डायमंड बुक्‍स, नई दिल्‍ली

15. साथ सहा गया दुख (पंजाबी), (प्रकाश्य), अनुवादक: डॉ. बलदेवसिंह बद्दन, प्रकाशक: भाषा विभाग पंजाब, पटियाला।

16. अधिकार (महासमर – 2) – उडिया – (प्रकाश्‍य), अनुवादक : सुभाषचंद्र महापात्र, प्रकाशक : प्रजातंत्र प्रचार समिति, कटक।

17. दीक्षा (कन्‍न्‍ड़ – दीक्षे), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव तथा डॉ. तिप्‍पेस्‍वामी), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

18. अवसर (कन्‍नड – संदर्भ), 2006 ई., (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

19. संघर्ष की ओर ( कन्‍नड – संघर्ष ), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

20. साक्षात्‍कार (कन्‍नड – साक्षात्‍कारा), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

21. पृष्‍ठभूमि (कन्‍नड़ – भूमिके), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

22. अभियान (कन्‍नड – अभियाना), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 560010

23. युद्ध (कन्‍नड – युद्ध), 2006 ई. (अनुवादक: एम. वी. नागराजा राव), प्रकाशक : हेमंत साहित्‍य, राजाजी नगर, बंगलूर – 56001s0

24. तेरह कहानियां ( अंग्रेज़ी – हंगर एंड अदर स्‍टोरीज़ – Hunger and other Stories)  - 2009 ( traslated by Rekha Gupta) publisher: Full Circle ( Hind Pocket Books) New Delhi-3

25. अवसर ( अंग्रेज़ी – द अपॉर्चुनिटी – The opportunity) – 2009 (Translated by Dr. Sharad Rajimvale) publisher : Dimond Books, Delhi

26. वसुदेव (संस्‍कृत – वसुदेव:) – 2011 ( अनुवादिका – श्रीमती सरिता कृष्‍णशास्‍त्री) प्रकाशक : संस्‍कृत भारती, माता मंदिर गली, झंडेवालान्, नई दिल्‍ली- 110055

27. अधिकार – महासमर-2( मल्‍यालम – अधिकारम्) – 2011 (अनुवादक : डॉ. के.सी. अजयकुमार तथा डॉ. के. सी. सिंधु) प्रकाशक : पूर्ण पब्लिकेशंस, कोजि़कोड (केरल)

28­­­. अभिज्ञान( अंग्रेजी – The Song of Sudama )2012 ( Translated by Rekha Gupta) publisher: Full Circle ( Hind Pocket Books) New Delhi-3

29. धर्म – महासमर- 3 (मल्‍यालम – धर्मम् 2012) (अनुवादक : (अनुवादक : डॉ. के.सी. अजयकुमार ) प्रकाशक : पूर्ण पब्लिकेशंस, कोजि़कोड (केरल)

 

पुरस्कार तथा सम्मान

1. राज्य साहित्य पुरस्कार 1975-76 ई. (साथ सहा गया दुख) शिक्षा विभाग, उत्‍तरप्रदेश शासन, लखनऊ।

2. उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार 1977-78 ई. (मेरा अपना संसार), उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ।

3.इलाहाबाद नाट्य संघ पुरस्कार, 1978 ई. (शंबूक की हत्या), इलाहाबाद नाट्य संगम, इलाहाबाद।

4. उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार, 1979-80 ई. (संघर्ष की ओर) उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ।

5. मानस संगम साहित्य पुरस्कार, 1978 ई. (समग्र रामकथा), मानस संगम, कानपुर।

6. श्रीहनुमान मंदिर साहित्य अनुसंधान संस्थान विद्यावृत्ति – 1982 ई. (समग्र रामकथा), श्रीहनुमान मंदिर साहित्य अनुसंधान संस्थान, कोलकाता।

7.साहित्य सम्मान 1985-86 ई. (समग्र साहित्य), हिंदी अकादमी, दिल्ली।

8. साहित्यिक कृति पुरस्कार, 1987- 88 ई. (महासमर-1, बंधन), हिंदी अकादमी, दिल्ली।

9.डॉ. कामिल बुल्के पुरस्कार 1989-90 ई. (समग्र साहित्य), राजभाषा विभाग, बिहार सरकार, पटना।

10. चकल्लस पुरस्कार, 1991 ई. (समग्र व्यंग्य साहित्य), चकल्लस पुरस्कार ट्रस्‍ट, 81 सुनीता, कफ परेड, मुंबई ।

11. अट्टहास शिखर सम्मान – 1994 ई. (समग्र व्यंग्य साहित्य), माध्यम साहित्यिक संस्थान, लखनऊ।

12. शलाका सम्मान 1995- 96 ई. (समग्र साहित्य), दिल्ली हिंदी अकादमी, दिल्ली।

13. साहित्य भूषण – 1998 (समग्र साहित्य), उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ।

14. डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान – 2000 ई. (समग्र साहित्य), श्रीबड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय, कोलकाता ।

15. रामकथा सम्मान – 2003 ई. (अभ्युदय), साकेत निधि, दिल्ली।

16. पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान – 2004 ई. (समग्र साहित्‍य), उत्‍तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ।

17. भाषा भूषण – 2004 ई., साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, (राजस्थान)

18. हिंदी गौरव – 2005 ई., साहित्य सभा, सीतापुर (उत्‍तरप्रदेश)

19. जनवाणी सम्‍मान – 2007 ई. (समग्र साहित्‍य), इटावा हिंदी सेवा निधि, इटावा।

20. गोयनका व्‍यंग्‍य साहित्‍य सारस्‍वत सम्‍मान – 2008, कमला गोयनका फाउंडेशन, मुंबई।

21. व्‍यंग्‍य सम्‍मान ?  साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, (राजस्थान)

22. साहित्‍यश्री सम्‍मान – 2010, दिल्‍ली हिंदी साहित्‍य सम्‍मेलन, दिल्‍ली।

23. डी. लिट् की मानद उपाधि – देव संस्‍कृति विश्‍वविद्यालय, हरिद्वार, 9 दिसंबर 2012 ई.

 

सदस्यता

1. पूर्व सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, भारी उद्योग विभाग, उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

2. पूर्व सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

3. पूर्व सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

4. पूर्व सदस्य, केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

5.सदस्य, नचिकेता सम्मान चयन समिति, नई दिल्ली1

6.पूर्व सदस्य, मूल्यांकन समिति, भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार योजना, प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

7. सदस्य, पुस्तक चयन समिति, (1998-2000 ई., 2000-2002 ई.), केन्द्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

8.पूर्व सदस्य, पुरस्कार समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, दिल्ली।

9. पूर्व सदस्य, संचालन समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, दिल्ली।

10.पूर्व सदस्य, कार्यकारी समिति, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार, दिल्ली।

11. पूर्व सदस्य, केन्द्रीय अनुदान समिति, केन्द्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।

12. पूर्व सदस्य, पुरस्कार समिति, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा।

15. सदस्य, विश्वहिंदी सम्मेलन, सूरीनाम- 2003 ई., प्रबंध समिति।

16.सदस्य, सरकारी शिष्टमंडल, विश्व हिंदी सम्मेलन, सूरीनाम- 2003 ई.।

17. सदस्य, विदेश मंत्रालय, विश्व हिंदी सम्मेलन समिति – 2004 ई.।

18. विशिष्ट निमंत्रण, हिंदी सलाहकार समिति, सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार।

19. सदस्य, नाट्य सलाहकार बोर्ड, (1997-98 ई.), साहित्यकला परिषद्, दिल्ली सरकार, दिल्ली।

20. सदस्य, संचालन समिति, (1997-98 ई.), साहित्यकला परिषद्, दिल्ली सरकार, दिल्ली।

13. संरक्षक, संस्कार भारती, दिल्ली प्रदेश, दिल्ली।

14. न्यासी, स्नेह भारती, दिल्ली – 110054

 

सहायक पुस्तकें

1. नरेन्द्र कोहली: व्यक्तित्व और कृतित्व, संपादक: नर्मदाप्रसाद उपाध्याय, 1985 ई.

2.व्यंग्यकार नरेन्द्र कोहली, लेखक : डॉ. सतीश पांडेय, 1993 ई.

3.नरेन्द्र कोहली :चिंतन और सृजन, लेखक: डॉ. सतीश पांडेय, 2002 ई.

4.सृजन साधना, (नरेन्द्र कोहली के व्यक्तित्व और चिंतन संबंधी संस्मरण), लेखक: ईशान महेश, 1995 ई.

5. पौराणिक उपन्यास: समीक्षात्मक अध्ययन, (नरेन्द्र कोहली के तीन उपन्यासों – ‘अभिज्ञान’, ‘तोड़ो कारा तोड़ो’ तथा ‘प्रच्छन्न’ का शोधपरक अध्ययन), लेखक-त्रय: डॉ. हितेन्द्र यादव, डॉ. कविता सुरभि, सुनीता सक्सैना, 2000 ई.,

6.नरेन्द्र कोहली: विचार और व्यंग्य, लेखक: डॉ. सुरेश कांत, 2000 ई.,

7.एक व्यक्ति नरेन्द्र कोहली, संपादक: कार्त्तिकेय कोहली, 2000 ई.,

8.नरेन्द्र कोहली के राम साहित्य का विशेष अनुशीलन, लेखक: डॉ. गिरीशकुमार जोशी, 1997 ई.

9. आधुनिक उपन्यास: विविध आयाम, लेखक: डॉ. विवेकीराय, 1990 ई.,

10. समकालीन हिंदी उपन्यास, लेखक: डॉ. विवेकीराय,1987 ई.

11. स्वातंत्र्योत्‍तर हिंदी व्यंग्य निबंध, लेखिका: डॉ. शशि मिश्र, 1992 ई.

12. नरेन्द्र कोहली ने कहा, (नरेन्द्र कोहली के आत्मकथ्य और उनकी रचनाओं में से विचारपूर्ण सूक्तियों का संचयन), संचयन : ईशान महेश,1997 ई.,

13.कुछ नरेन्द्र कोहली के विषय में (आत्मकथ्य), 1996 ई.,

14. आधुनिक सांस्कृतिक जीवन के व्याख्याता : नरेन्द्र कोहली (परिचय), 2000 ई.,

15. नरेन्द्र कोहली – अप्रतिम कथायात्री, लेखक : डॉ. विवेकीराय, 2003 ई.,

16. नरेन्द्र कोहली की कहानियों में व्यंग्य, लेखिका: श्रीमती सुरेश सौंखले,

17.कहानीकार नरेन्‍द्र कोहली, लेखिका: डॉ. सुरैया शेख, 2006 ई.,

18. अभ्‍युदय: संवेदना का विकास, लेखिका: डॉ. कविता सुरभि, 2007 ई.

19. रामकथा: कालजयी चेतना, लेखिका: डॉ.(श्रीमती) के.सी.सिंधु, 2007ई.,

20. मिथकीय चेतना:समकालीन संदर्भ, लेखिका: डॉ.(श्रीमती) मनोरमा मिश्र, 2007 ई.

21. डॉ. सिद्धार्थ, (उपन्‍यास) , लेखिका : डॉ. कविता सुरभि, 2008 ई.,

 

पत्रिकाओं के विशेषांक

1. बात तो चुभेगी, अगस्त सितंबर 1981 ई., संपादक : डॉ. सुरेश कांत

2. व्यंग्य विविधा, सितंबर- नवंबर 1995 ई., संपादक : डॉ. प्रेम जनमेजय, डॉ. मधुसूदन पाटिल

3. गोष्ठी : अंक 1-3, संपादक : कार्त्तिकेय कोहली

4. हिंदी चेतना : अक्‍तूबर 2008 ई., संपादक : श्‍याम त्रिपाठी

5. व्‍यंग्‍य-यात्रा : अक्‍तूबर-दिसंबर 2009 ई. संपादक : प्रेम जनमेजय

 

नरेन्द्र कोहली रचित साहित्य के शोधकर्ता

नरेन्द्र कोहली जी के साहित्य पर लगभग एक सौ दस से अधिक लोगों ने शोध पत्र प्रस्तुत किया है ।

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