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पत्र , पत्रिका और पाठकों के बीच संवाद का माध्यम हैं।

आपके पत्र हमारा मनोबल बढ़ाते है। हमें और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं।

आपके अपने खट्टे मीठे पत्रों की इस दुनिया में आपका स्वागत है…
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भाई अमित जी और डॉ पुष्पिता अवस्थी जी |
आप दोनों का ह्रदय से धन्यवाद पत्रिका को सुन्दर ढंग से बनाने के लिए ,और हम तक पहुंचाने के लिए | कुछ कवितायें और ग़ज़ल पढ़ीं , अच्छी लगी सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई |
सादर
सविता अग्रवाल’सवि’(कैनेडा )
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अमस्टेल गंगा का हरेक अंक अपने आप में खास है।इस पत्रिका को पढ़कर ऐसा लगता है मानो नीदरलैंड पहुंच गया हूं।आज की तिथि में किसी को अनुमान तक नहीं इसे सारी दुनिया देख रही है।हिंदी में प्रकाशित यह पत्रिका भारत की आत्मा है,ऐसा मुझे लग रहा है।मेरा प्रकाशक मण्डल से अनुरोध होगा कि एक कोई कार्यक्रम नीदरलैंड की धरती पर किया जाय,ताकि हम भारतीय को हिंदी की महत्ता और गरिमा की उन्नति और इसके विस्तार को समझने का अवसर मिल सके।मैं अंग्रेजी का प्राध्यापक हूं ,लेकिन हिंदी का पुत्र हूं और अपनी मां संस्कृत का भक्त हूं।
डॉ हनीफ
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आकर्षक आवरण के साथ सारगर्भित जानकारियां,
चुनिंदा श्रेष्ठ रचनाओं का गुलदान ।
सटीक संपादकीय।
सूर्यकरण सोनी
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आदरणीय अमित कुमार सिंह जी एवं डॉ पुष्पिता अवस्थी जी,
अम्स्टेल गंगा परिवार
नवीन अंक प्रकाशन हेतु बहुत-बहुत बधाई।
सादर,
डॉ०  चंद्रेश कुमार छतलानी
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आपके द्वारा किया जा रहा,यह बहुत ही बेहतर और सराहनीय काम हैं।
मगर आप अपनी पत्रिका में हम छोटे मोटे बिना नाम पहचान वाले रचनाकारों को भी जगह दीजिये,
बड़े और नाम वाले रचनाकारों तो कही भी जगह पा जाते है।
बिमल तिवारी
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‘पर्दाफ़ाश :
आदरणीय पुष्पिता जी
नमस्कार ।
आपकी पत्रिका ‘अम्स्टेल गंगा’ का सत्ताइस्वां (अक्टूबर-दिसंबर) अंक देखा l जिसमे कादम्बरी मेहरा जी की कहानी ‘पर्दाफ़ाश’ पढ़ी l जो दिलचस्प होने के साथ-साथ एक अनोखापन भी लिये हुये है l
कहानी के आरंभ में जैसा कि पश्चिमी देशों में होता है कि युवा बच्चे प्रेम प्रसंगों में पड़ जाते हैं वही इस कहानी में भी होता है । प्रेम प्रसंग अक्सर निष्फल भी हो जाते हैं । एंजेला के साथ भी ऐसा होता है । किन्तु इस कहानी में कुछ नवीनता सी है । कहानी पढ़ते हुए जैसे-जैसे कहानी के पन्ने खुलते जाते हैं तो एक तरह के रहस्य का आभास सा होने लगता है और मन मे तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं। और जिज्ञासा बढ़ती जाती है कि आगे क्या होने वाला है। कितने ही लोग इस दुनिया में ग्लैमर की जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन उनके जीवन के बारे में कई बार अंदाजा नहीं लग पाता। कई बार पैसा और चमक-दमक से भरी जिंदगी जीने वाले जो पाना चाहते हैं तो उसे  प्राप्त करके ही रहते हैं l फ्रैंक भी एक ऐसा ही आदमी है जो एक ग्लैमर की जिंदगी जी रहा है। उसके प्यार में न जाने कितनी लड़कियाँ व औरतें फंसती रहती हैं। करीब आधी कहानी पढ़ने के बाद कहानी में किसी अजीब से रहस्य का आभास होने लगता है । कहानी कई मोड़ों से गुजरती रहती है । और इसका अंत वाकई मे पाठक की सोच के बाहर होता है । इस कहानी की विशेषता यह है कि इसे पढ़ते हुए पाठक बोर नहीं होता ।
और उसकी दिलचस्पी अंत तक बनी रहती है ।
इस कहानी के कथानक को एक अनूठापन देने के लिये कादम्बरी जी को बहुत बधाई ।
सादर
-शन्नो अग्रवाल
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पर्दाफ़ाश :
कादम्बरी जी का लम्बी कहानी पर्दाफाश अन्त तक कौतूहल बनाए रखती है।कहानी का आन्तरिक संगठन अपने कलेवर के साथ संपूर्ण  और सुलझा हुआ है।घटनाओं के चयन तथा निर्वहन में पूरी सफ़लता मिली है।.बधाई कादम्बरी जी
उषा वर्मा
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हामिद की दिवाली:
बहुत अच्छा सन्देश है आपकी कविता में संगम जी साथ ही मार्मिक भी है सुन्दर और सरल भाषा में लिखी रचना है हार्दिक बधाई स्वीकारें |
सविता अग्रवाल , कनाडा
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तबादला:
हनीफ़ भाई, मुबारकबाद ।
संवेदनाओं को चाहिए सम्पर्क
और आपकी लेखनी में वह हुनर है ।
बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं मित्र।
डॉ धनंजय
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विश्वास की डोर :
बहुत ही बेहतर कविता
मुझे बहुत अच्छा लगा मैडम जी
बिमल तिवारी
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विश्वास की डोर :
अर्विना जी विशवास की डोर कविता में सकारात्मकता के साथ महिला के मन के दर को बखूबी प्रस्तुत किया है |
बधाई हो |
सविता अग्रवाल , कनाडा
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हां मैं अपनी फेवरेट हूं :
बिल्कुल नाम के अनुरूप रचना।एक अंतरराष्ट्रीय हस्ताक्षर।
डॉ हनीफ
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शाश्वत सत्य सनातन संस्कृति :
बहुत ही सुंदर।
डॉ हनीफ
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खुदगर्ज :
Very nice story. Today, many persons running behind to earn more and more money. Relations become spoiled behind money. This story teach us a good lesson.
Manoj Mishra , India
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