पत्रिका लेखागार

पत्रिका के इस पुरालेख अनुभाग में आप ‘अम्स्टेल गंगा’ के पुराने अंको को पढ़ सकते हैं।

12 thoughts on “पत्रिका लेखागार

  1. Many congratulations for such a high quality work from a remote corner of the world. Special thanks to Dr. Pushpita Awasthi Ji to participate in this magazine. She is a great signature in the field of literature. Wishing you a bright future.

  2. प्रिय बंधु,
    नमस्कार ! अमस्टेल गंगा के नए अंक की प्रतीक्षा है।

  3. अच्छा प्रयास।दूर रहकर भी हिंदी और हिंदुस्तानियों जो जोड़ने का प्रयास । जय भारत,जय नीदरलैण्ड

  4. आप की पत्रिका निश्चित ही प्रभावशाली तरीके से बेहतर सन्देश दे रही है ।हिन्दी भाषा और साहित्य के उत्थान में इस पत्रिका का सार्थक और सामयिक महत्व है । आप की पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं |

  5. हिंदुस्तान और हिंदी भाषा के लिए आपका कार्य प्रशंसनीय, अभिनंदनीय ,वंदनीय है।
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

  6. हिंदी साहित्य के विकास हेतु हिंदी साहित्य के अधिकांश व विभिन्न विधाओं को सम्मिलित करके पत्रिका को खूबसूरत रूप दिया गया है विदेशों में भी हिंदी को बढावा देने का सार्थक प्रयास।वाकई सराहनीय कार्य।सफलता व विकास की प्रबल कामना करती हूं

  7. नीदरलैंड और भारत की साझी संस्कृति को एक मंच पर लाने तथा हिन्दी साहित्यकारों के लिए एक वैश्विक फलक निर्माण की दिशा में किये गए इस भागीरथी प्रयास पर एम्स्टेल गंगा के सम्पादकीय टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।

  8. आपके द्वारा किया जा रहा,यह बहुत ही बेहतर और सराहनीय काम हैं।
    मगर आप अपनी पत्रिका में हम छोटे मोटे बिना नाम पहचान वाले रचनाकारों को भी जगह दीजिये,
    बड़े और नाम वाले रचनाकारों तो कही भी जगह पा जाते है।

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