पत्रिका के अनुभाग: जनवरी – मार्च २०१५

पत्रिका के अनुभाग: जनवरी – मार्च २०१५ (अंक १०, वर्ष ४)

अम्स्टेल गंगा के इस फुलवारी में आपका स्वागत है।
रंग बिरंगे फूलों की इस बगीया में विचरण करे और हमें अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत करायें।

सम्पादक मंडल
अम्स्टेल गंगा

पत्रिका के अनुभाग: विषय सूची 

 

हिंदी साहित्य:::

काव्य साहित्य:

      ग़ज़ल:

ग़ज़ल : सुशील ठाकुर ‘साहिल’

सीमा गुप्ता की ग़ज़ल : मेरे चेहरे पे जो कहानी है

कुण्डलियाँ::

कुण्डलियाँ: डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

ताँका::

ताँका : डॉ जेन्नी शबनम

कविता:

जमी हुई तनहाई – कादंबरी मेहरा

एक आस – ज्योत्स्ना प्रदीप

कारगिल – नीरज त्रिपाठी

लम्हों के परिंदें – स्वर्णलता ठन्ना

अतीत का अवलोकन – संध्या सिंह

सूई-धागा – अरुण चन्द्र रॉय

लेख::

हम  भारत  के  लोग – डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री

तन और मन की सभ्यता प्रदान करता है साहित्य …- डॉ. सुनिल जाधव

भगोरिया पर्व – संजय वर्मा “दृष्टि“

विवेकानंद जयंती विशेष : राष्ट्रीय युवा दिवस – युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय”

व्यंग्य::

और अब ई-सफाई… – गिरीश पंकज

अबके बरस मैं खेलूंगी ई-होली – सुमन सारस्वत

भूत – अमित कुमार सिंह

 बर्ड फ्लू अमर रहे – नीरज त्रिपाठी

नाटक::

एक शहर की मौत – विजय कुमार

लघुकथा::

अपनी-अपनी ज़मीन – बलराम अग्रवाल

तुम्हें शर्म नहीं आती – गोवर्धन यादव

शहीद मोहित – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

प्यार के खूनी धब्बे – मंजु गुप्ता

कहानी::

पार उतरना धीरे से… – विवेक मिश्र

स्वयं से किया गया वादा – डॉ स्वाति तिवारी

यह तो होना ही था – मधु अरोड़ा

आसमान छोटा नहीं है… – प्रियंका गुप्ता

क्षति-पूर्ति – पुष्पा सक्सेना

भोजपुरी हिंदी साहित्य:::

मनोज सिंह ‘भावुक’ के दोहे

मनोज भावुक को मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री सर अनिरुद्ध .. … – प्रीति सिंह

साहित्यिक समाचार :::

दिव्या माथुर के उपन्यास ‘शाम भर बातें’ का लोकार्पण – दिव्या वातायन कविता संस्था

मॉरीशस के राष्ट्रपति कैलाश पुरयाग ने किया प्रथम भोजपुरी ग़ज़ल- अल्बम ” तस्वीर जिंदगी के ” का विमोचन – प्रीति सिंह

लखनऊ में संपन्न हुआ चौथा नवगीत महोत्सव – डॉ सुमन सास्वत

अप्रवासीय रोजनामचा::

आप बीती – कुवैत – अमित सिंह

कला दीर्घा::: 

राधा-श्याम – स्वाति सिंह देव

बारिश का एक दिन – मीनू सिंह

आकर्षक एम्स्टर्डम – शिल्पी अग्रवाल

पुष्प रस – कृशानु रॉय

पुष्प – मीनाक्षी सिंह

प्रकृति की सजीवता – अमित कुमार सिंह

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