दरकते रिश्ते

आज बहुत दिनों बाद सरिता से गार्डन में मुलाकात हुई
कैसी हो ?
सरिता :ठीक हूँ
बहुत दुबली हो गई हो?
सरिता :हां ज़रा बिमार चल रही हूँ बहुत कमज़ोरी महसूस करती हूँ घर का काम नही होता आजकल
अरे तुम्हारी बहू है और कामवाली भी तो आती है
सरिता:बहू तो चली गई नया घर ले लिया है तो कामवाली भी ले गई
और तुम्हे?
सरिता :बहू का कहना है आप को
टी बी है  मेरे बच्चों को हो जायेगी इस लिए आप पुराने घर में रहें हम आते जाते रहेंगें।
मैं हक्का-बक्का रह गई
मुझे पता है सरिता ने बड़ी तकलीफ से अपने बेटे को बिना पति के बड़ा किया जवानी में बेवा होकर भी दूसरी शादी नही की बेटा जो है सहारे के लिए ।

 

- रज़िया रागिनी ‘समर’

रेडियो और टीवी से जुड़ी  हूँ ।
संगीत के घराने से ताल्लुक है तो संगीत मुझ में भी है।
लिखने पढ़ने का बचपन से लगाव रहा है ।
जो मुझ में,और मेरे आसपास घटता है उसे अपनी ज़बान में पन्नों पर उतारने की कोशिश करती हूँ ।
अभी व्यक्तिगत परामर्शदाता की वजह से लोगों से जुड़ी हुई हूँ और उनकी परेशानी से  निकलने में उनकी मदद करने की कोशिश करती हूँ ।
रेडियो और टीवी पर नज़्में प्रसारित हुई हैं,कई मंचो पर भी अपनी नज़्में कही हैं ।

 

One thought on “दरकते रिश्ते

  1. विराम चिह्नों का प्रयोग भी रचनाकार को आना चाहिए।
    अच्छे विषय, बढिया कथानक पर एक कमजोर रचना।
    सम्पादक मंडल को अधिक सचेत होकर रचनाओका चयन करना चाहिए।

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