त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कुण्डलियां

लगते ढोल सुहावने, जब बजते हों दूर।
चंचल चितवन कामिनी, दूर भली मशहूर।।
दूर भली मशहूर, सदा विष भरी कटारी।
कभी न रहती ठीक, छली, कपटी की यारी।
‘ठकुरेला’ कविराय, सन्निकट संकट जगते।
विषधर, वननृप, आग, दूर से अच्छे लगते।।
***
जीना है अपने लिये, पशु को भी यह भान।
परहित में मरता रहा, युग युग से इंसान।।
युग युग से इंसान, स्वार्थ को किया तिरोहित।
द्रवित करे पर-पीर, पराये सुख पर मोहित।
‘ठकुरेला’ कविराय, गरल परहित में पीना।
यह जीवन दिन चार, जगत हित में ही जीना।।
***
रहता है संसार में सदा न कुछ अनुकूल।
खिलकर कुछ दिन बाग़ में, गिर जाते हैं फूल।।
गिर जाते हैं फूल, एक दिन पतझड़ आता।
रंग, रूप, रस, गंध, एकरस क्या रह पाता।
‘ठकुरेला’ कविराय, समय का दरिया बहता।
जग परिवर्तनशील, न कुछ स्थाई रहता।।
***
चलता राही स्वयं ही, लोग बताते राह।
कब होता संसार में, कर्म बिना निर्वाह।।
कर्म बिना निर्वाह, न कुछ हो सका अकारण।
यह सारा संसार, कर्म का ही निर्धारण।
‘ठकुरेला’ कविराय, कर्म से हर दुख टलता।
कर्महीनता मृत्यु, कर्म से जीवन चलता।।
***
रिश्ते-नाते, मित्रता, समय, स्वास्थ्य, सम्मान।
खोने पर ही हो सका, सही मूल्य का भान।।
सही मूल्य का भान, पास रहते कब होता।
पिंजरा शोभाहीन, अगर उड़ जाये तोता।
‘ठकुरेला’ कविराय, अल्पमति समझ न पाते।
रखते बडा महत्व, मित्रता, रिश्ते-नाते।।
***
लोहा होता गर्म जब, तब की जाती चोट।
सर्दी में अच्छा लगे, मोटा ऊनी कोट।।
मोटा ऊनी कोट, ग्रीष्म में किसको भाया।
किया समय से चूक, काम वह काम न आया।
‘ठकुरेला’ कविराय, उचित शब्दों का दोहा।
भरता शक्ति असीम, व्यक्ति को करता लोहा।।

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

 

जन्म-स्थान —– नगला मिश्रिया ( हाथरस )

प्रकाशित कृतियाँ — 1. नया सवेरा ( बाल साहित्य )

2. काव्यगंधा ( कुण्डलिया संग्रह )

सम्पादन — 1. आधुनिक हिंदी लघुकथाएँ 
2. कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर 
3. कुण्डलिया कानन

सम्मान / पुरस्कार — 1. राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा ‘शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार ‘
2. पंजाब कला , साहित्य अकादमी ,जालंधर ( पंजाब ) द्वारा ‘ विशेष अकादमी सम्मान ‘
3. विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ , गांधीनगर ( बिहार ) द्वारा ‘विद्या- वाचस्पति’ 
4. हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रयाग द्वारा ‘वाग्विदाम्वर सम्मान ‘
5. राष्ट्रभाषा स्वाभिमान ट्रस्ट ( भारत ) गाज़ियाबाद द्वारा ‘ बाल साहित्य भूषण ‘
6. निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान , बस्ती ( उ. प्र. ) द्वारा ‘राष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान’ 
7. हिंदी साहित्य परिषद , खगड़िया ( बिहार ) द्वारा स्वर्ण सम्मान ‘

विशिष्टता — कुण्डलिया छंद के उन्नयन , विकास और पुनर्स्थापना हेतु कृतसंकल्प एवं समर्पित

सम्प्रति — उत्तर पश्चिम रेलवे में इंजीनियर

संपर्क —- आबू रोड -307027 ( राजस्थान )

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