चूहे बोलें बम बम

 

अखबार में पढ़ा कि अपने देश में
बम का पता लगाने के लिए चूहों को आजमा रहे हैं
कोलंबिया में चूहे पहले से ही
बम और लैंड माइंस की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं
चुने गए चूहों को दस महीने की ट्रेनिंग दी जाती है
उसके बाद उन्हें ब्लैक रैट कमांडो की डिग्री मिल जाती है
बम मिलते ही निष्क्रिय होने तक चूहा दो पैरों पर खड़ा रहेगा
चूं चूं बम बम चीं चीं करके बम का सिग्नल देगा
मौका हाथ से न जाए बुजुर्ग चूहे नौजवानों को बता रहे हैं
नारे लगा सब एक दूसरे का हौसला बढ़ा रहे हैं
सिम्मी को मम्मी हुजी को नानी जी याद दिलाएंगे
ओसामा की कुतर के दाढ़ी चौराहे पर लटकायेंगे
कुछ चूहे दंडबैठक लगा रहे हैं
कुछ कुश्ती लड़ते नजर आ रहे हैं
कुछ अंकुरित दाल चना खा रहे हैं
कुछ दूध और घी में नहा रहे हैं
सब मिल सिक्स पैक मसल बना रहे हैं
सारी चुहिया सुंदरियाँ गायब
बस अंडर टेकर और खली के पोस्टर बिलों में नजर आ रहे हैं
जब किसी चूहे को कोई पुरूस्कार मिलता है
तो वो सबके सामने से इतराकर निकलता है
चूहे की इतनी पब्लिसिटी हो जाती है की बिल्ली चाहकर भी कुछ कर नही पाती है
अच्छा काम किया कहकर सबके साथ खड़े होकर तालियाँ बजाती है
किसी चैनल पर चीं चीं किसी पर चूं चूं
ब्रेकिंग न्यूज़ में भी चूहे ही आ रहे हैं
प्रचारों से शाहरूख अमिताभ गायब
चूहे च्यवनप्राश और डिश टीवी के फायदे बता रहे हैं
मैं घर लौटा तो देखा तीन चूहे दो पैरों पर खड़े थे
मुझे डरा सहमा देख बोले डरो मत नीरज भाई
हम तो बस प्रैक्टिस कर रहे हैं बम वाली ट्रेनिंग में जाने के लिए …..

 

-नीरज त्रिपाठी

 

शिक्षा- एम. सी. ए.

कार्यक्षेत्र – हिंदी और अंग्रेजी में स्कूली दिनों से लिखते रहे हैं | साथ ही परिवार और दोस्तों के जमघट में   कवितायेँ पढ़ते रहे हैं |

खाली समय में कवितायेँ लिखना व अध्यात्मिक पुस्तके पढ़ना प्रिय है |

प्रतिदिन प्राणायाम का अभ्यास करते हैं और जीवन का एकमात्र लक्ष्य खुश रहना और लोगों में खुशियाँ फैलाना है |

कार्यस्थल – माइक्रोसॉफ्ट, हैदराबाद

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