क्या हमें अँग्रेजी की गुलामी छोडकर हिन्दी को महत्व नहीं देना चाहिए ?

भारतवर्ष से अंग्रेज तो चले गये, पर अंग्रेजी नहीं गई। अंग्रेजों की गुलामी से तो मुक्त हुए, पर अंग्रेजी के गुलाम हो गये।जब जापान जापानी भाषा में और चीन अपनी चीनी भाषा में प्रगति कर सकता है तो हम अपनी मातृभाषा में क्यों प्रगति नहीं कर सकते।

हम अपनी “हिंदी” भाषा को उचित स्थान नहीं देते हैं अपितु अंग्रेजी जैसी भाषा का प्रयोग करने में गर्व महसूस करते हैं ।कोरिया का उदहारण ले तो वह बिना इंग्लिश को अपनाए हुए ही विकसित हुए हैं और हम समझते हैं की इंग्लिश के बिना आगे नहीं बढा जा सकता।

हिंदी अति सरल और मीठी भाषा हैं। हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। तभी तो देश के बाहर भी हिंदी ने अपना स्थान बना सकने में सफलता हासिल किया है। फ़िजी, नेपाल, मोरिशोस, गयाना, सूरीनाम यहाँ तक चाइना और रसिया में भी हिंदी अच्छी तरह बोली और पढ़ी जाती है।
*हिन्दी के प्रभाव और क्षमता को अब विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां भी सलाम कर रही है। विश्व में मोबाइल की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया ने हाल ही लन्दन में अपने तीन नए मॉडल बाजार में उतारे। आपको ये जानकर खुशी होगी कि इन तीनो मॉडल्स को कंपनी ने हिन्दी का नाम दिया है। इन्हें अमेरिका, यूरोप और एशिया यानी पूरी दुनिया में आशा-300 और आशा-200 मॉडल के फोन लांच किए।
*अटल बिहारी वाजपयी वे पहले भारतीय थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ (1977) में हिंदी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था। (अटल बिहारी वाजपयी 1977 में विदेश मंत्री थे)
*जुरासिक पार्क जैसी अति प्रसिध्द हॉलीवुड फ़िल्म को भी अधिक मुनाफ़े के लिए हिंदी में डब किया जाना जरूरी हो गया । इसके हिंदी संस्करण ने भारत में इतने पैसे कमाए जितने अंग्रेजी संस्करण ने पूरे विश्व में नहीं कमाए थे ।
*अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 114 मिलियन डॉलर की एक विशेष राशि अमरीका में हिंदी, चीनी और अरबी भाषाएं सीखाने के लिए स्वीकृत किया था । इससे स्पष्ट होता है कि हिंदी के महत्व को विश्व में कितनी गंभीरता से अनुभव किया जा रहा है ।
*हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। – मैथिलीशरण गुप्त।
*बह्म समाज के नेता बंगला-भाषी केशवचंद्र सेन ने भी हिन्दी का समर्थन किया था।
* गुजराती भाषा-भाषी स्वामी दयानंद सरस्वती ने जनता के बीच जाने के लिए ‘जन-भाषा’ हिन्दी सीखने का आग्रह किया ।
*गुजराती भाषा-भाषी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मराठी-भाषा-भाषी चाचा कालेलकर जी को सारे भारत में घूम-घूमकर हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने का आदेश दिया।
*सुभाषचंद्र बोस की ‘आजाद हिन्द फौज’ की राष्ट्रभाषा हिन्दी ही थी।
*श्री अरविंद घोष हिन्दी-प्रचार को स्वाधीनता-संग्राम का एक अंग मानते थे।
* नागरी लिपि के प्रबल समर्थक न्यायमूर्ति श्री शारदाचरण मित्र ने तो ई. सन् 1910 में यहां तक कहा था – यद्यपि मैं बंगाली हूं तथापि इस वृद्धावस्था में मेरे लिए वह गौरव का दिन होगा जिस दिन मैं सारे भारतवासियों के साथ, ‘साधु हिन्दी’ में वार्तालाप करूंगा।

* अहिन्दी-भाषी-मनीषियों में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने भी हिन्दी का समर्थन किया था।
*अनेक देश हिंदी कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें बीबीसी, यूएई क़े ‘हम एफ-एम’ ,जर्मनी के डॉयचे वेले, जापान के एनएचके वर्ल्ड और चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिंदी सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
*हॉलीवुड ने पहचानी हिन्दी की ताकत – बहुचर्चित मशहूर ओर कामयाबी का नया इतिहास रचने वाली चलचित्र ( फ़िल्म) को दिया वैश्विक हिन्दी नाम ‘अवतार’ ।हिंदी शब्द अवतार का अर्थ ‘अवतार’ शब्द ‘अव’ उपसर्गपूर्वक ‘तृ’ धातु में ‘धण’ प्रत्यय लगाकर बना है। अवतार शब्द का अर्थ यह है कि पृथ्वी में आना।हॉलीवुड की मशहूर फ़िल्म “अवतार” दुनिया की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली चलचित्र ( फ़िल्म) बन गई है ।
क्या हमें अँग्रेजी की गुलामी छोडकर हिन्दी को महत्व नहीं देना चाहिए ? दोस्तों-जब हम हिन्दुस्थान में रहते हुए भी हम हिंदी का प्रयोग नहीं करेंगे तो क्या अमरीका व अन्य देशों के नागरिक प्रयोग करने के लिए आयेंगे?
जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !

 

 - युद्धवीर सिंह लांबा ” भारतीय “ 

 

व्यवसाय:

मै युद्धवीर सिंह लांबा ” भारतीय “  वर्तमान में हरियाणा प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली रोहतक रोड स्थित  (एनएच -10)  बहादुरगढ़ , जिला. झज्जर , हरियाणा राज्य , भारत में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में 23 मई 2012 से काम कर रहा है|

मैने एस.डी. प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान, इसराना, पानीपत ( हरियाणा ) (एनसी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग  टेक्निकल कैंपस की सहयोगी संस्था) में 3 मई 2007 से 22 मई 2012 तक कार्यालय अधीक्षक के रूप में कार्य किया। मैने 27अगस्त, 2011 को रामलीला मैदान, दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के जनलोकपाल बिल पारित की मांग लेकर  अनिश्चितकालीन अनशन में भाग लिया था |

शिक्षा:

मैने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय , झज्जर ( हरियाणा ) से बी.ए.  और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (ए-ग्रेड), रोहतक (हरियाणा )  से एमए (राजनीति विज्ञान )  पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, जालंधर ( पंजाब ) से पीजीडीसीए पारित कर और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवाड़ा ( पंजाब ) से  M.SC ( कंप्यूटर विज्ञान ) कर रहा है|

शौक: मुझे फेसबुक में भारतीय संस्कृति के लिए लिखना बहुत पसंद है । 

 

3 thoughts on “क्या हमें अँग्रेजी की गुलामी छोडकर हिन्दी को महत्व नहीं देना चाहिए ?

  1. हॉलैंड से प्रकाशित होने वाली पहली हिंदी पत्रिका ‘अम्स्टेल गंगा’ पर मेरे लेख प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय”
    प्रशासनिक अधिकारी
    हरियाणा इंस्टिटयूट ऑफ टेक्नॉलॉजी, दिल्ली रोहतक रोड (एनएच -10) बहादुरगढ़, जिला. झज्जर, हरियाणा राज्य, भारत

  2. YUDHVIR SINGH LAMBA SIR, I LIKE YOUR ARTICLE ON HINDI. NO DOUBT HINDI IS A NATIONAL LANGUAGE OF INDIA.

    AMIT KUMAR, LAB ASSTT. CSE, HIT

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